Skip to content

भाषा और लिपि में अंतर क्या है : Bhasha Aur Lipi Me Antar

भाषा और लिपि में अंतर : आज के समय में दुनिया में कई भाषाएँ बोली जाती हैं और इन सभी भाषाओं की उत्पत्ति किसी ना किसी लिपि से होती है। लेकिन कई लोग भाषा और लिपि में क्या अंतर है (Bhasha Aur Lipi Me Antar) को नही समझ पाते हैं।

इसलिए आप लोगों की मदद के लिए यहाँ हमने भाषा और लिपि में अंतर क्या होता है, इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी है, जो आपको भाषा और लिपि के अंतर को समझने में मदद करेगा।

विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए भाषा बहुत ज़रूरी होती है, उसी तरह हर भाषा के लिए लिपि ज़रूरी होती है, बिना लिपि के कोई भाषा नही बन सकती है। कई लोग जो यह नहीं जानते की ‘भाषा और लिपि के बीच में अंतर क्या है (What is the Difference Between Language and Script in Hindi)”, तो इस आर्टिकल को पढ़ कर आप इसके बारे में विस्तृत जानकारी पा सकते हैं।

भाषा और लिपि में अंतर | Bhasha Aur Lipi Me Antar

भाषा उस यादृच्छिक ध्वनि प्रतीकों की व्यवस्था को कहते हैं, जिसके द्वारा हम अपने विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। जबकि लिपि उस यादृच्छिक, वर्ण प्रतीकों की व्यवस्था को कहते हैं जिसके द्वारा किसी भाषा को लिखित रूप दिया जाता है।

यहाँ यह जानना ज़रूरी है कि भाषा और लिपि में कोई अनिवार्य सम्बंध नहीं है। प्राचीन समय में लाखों वर्षों तक कई भाषाएँ बिना लिपि के ही आम बोलचाल में प्रयुक्त होती रही है।

हिंदी भाषा की लिपि क्या है

संबंधित जानकारी :  Hindi Bhasha Ki Lipi Kya Hai | हिंदी भाषा की लिपि क्या है

भाषा और लिपि में अंतर क्या है (Bhasha Aur Lipi Me Antar) इसको हम नीचे दी गई जानकारी से अच्छी तरह से और आसान शब्दों में समझ सकते हैं।

भाषा वह साधन है, जिसके द्वारा हम बोलकर, सुनकर, लिखकर व पढ़कर अपने मन की भावनाओं या विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। जबकि ‘लिपि’ या लेखन प्रणाली का अर्थ होता है, किसी भाषा की लिखावट या लिखने का ढंग। यानि लिपि, भाषा के लिए नियम तय करती है।

संस्कृत भाषा की लिपि क्या है

भाषा और लिपि में अंतर निम्नलिखित हैं :

भाषा (Language)लिपि (Script)
ऐसा माध्यम जिसके द्वारा हम अपने विचारों को लिखित या कथित रूप से दूसरों को समझा सके और दूसरों के भावों को समझ सके, उसे भाषा कहते है।भाषा और इसकी ध्वनियों को लिखने के लिए जिन चिह्नों या प्रतीकों का उपयोग किया जाता है, उसे लिपि कहते हैं।
सार्थक शब्दों के समूह या संकेत को भाषा कहते है।लिपि भाषा का नियम होती है, इसे भाषा के व्याकरण का नियम भी कह सकते हैं।
भाषा का इस्तेमाल आम बोलचाल में किया जाता है। यानि भाषा वो चीज़ होती है, जो बोली जाती हैलिपि का इस्तेमाल सिर्फ भाषा को मानकीकृत करने और इसके नियम-क़ायदे बनाने के लिए किया जाता है।
भाषा व्यापक रूप से कई क्षेत्रों में बोली जाती हैं।लिपि का इस्तेमाल किसी भी क्षेत्र में बोलचाल में नही किया जाता है।
भाषा मूलतः प्रतीकों की एक व्यवस्था है। ये प्रतीक ध्वनि प्रतीक होते हैं, जो यादृच्छिक होते हैं। भाषा को निम्न प्रकार से व्यक्त कर सकते हैं – ‘यादृच्छिक, ध्वनि, प्रतीकों की व्यवस्था’‘लिपि’ लिपि चिह्नों की व्यवस्था होती है। जिसके द्वारा वाचिक रूप से व्यक्त किए जाने वाले विचारों को चित्रात्मक प्रतीकों द्वारा लिखकर व्यक्त किया जाता है।
भाषा की अभिव्यक्ति का प्राथमिक माध्यम है।लिपि, भाषा की अभिव्यक्ति का द्वितीयक माध्यम है, जो ऐच्छिक है।
भाषा का विकास लिपि से पहले हुआ है।लिपि का विकास भाषा के विकास के हजारों साल बाद हुआ है।
लिपि के बिना भाषा का अस्तित्व हो सकता है। आज भी कई भाषाएँ हैं जिनकी कोई लिपि नहीं है।भाषा के बिना कोई लिपि नही हो सकती।
भाषा परिवर्तनशील होती है।भाषा की तुलना में लिपि अधिक रूढ़िवादी होती है।

भारत की भाषाओं की प्रमुख लिपियाँ

  • ब्राह्मी लिपि
  • खरोष्ठी लिपि
  • कुटिल लिपि
  • देवनागरी लिपि
  • शारदा लिपि
  • गुरुमुखी लिपि
  • ग्रंथ लिपि
  • तेलुगू एवं कन्नड़ लिपि
  • तमिल-मलयालम लिपि
  • शाहमुखी लिपि
  • मोडी लिपि
संबंधित जानकारी :  Sanskrit Bhasha Ki Lipi Kya Hai | संस्कृत भाषा की लिपि क्या है

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में हमने भाषा और लिपि में अंतर क्या है (Bhasha Aur Lipi Me Antar) के बारे में जानकारी दी है। आशा करते हैं कि लिपि और भाषा में क्या अंतर है (What is the Difference Between Language and Script in Hindi) कि यह जानकारी आपको पसंद आएगी।

Spread the love by sharing this article :-