आज के डिजिटल युग में हिंदी महत्वपूर्ण क्यों है – भारत में 90% नए इंटरनेट उपयोगकर्ता क्षेत्रीय भाषाओं में सामग्री का उपभोग करते हैं : गूगल रिपोर्ट

मुख्य बिंदु भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ता (Summary of Hindi Language Internet Users)

  • भारत में 2015 से 2018 तक 4 करोड़ नए इंटरनेट उपयोगकर्ता जुड़े हैं।
  • भारत में 2015-16 के दौरान इंटरनेट में हिंदी सामग्री की खपत 90% से अधिक बढ़ गई है।
  • इस बीच अंग्रेजी (English) अभी भी भारत में Google में सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली भाषा है।

आज के समय में भारत के साथ पूरी दुनिया के लिए हिंदी महत्वपूर्ण भाषा क्यों बन गई है। इस पोस्ट में आज हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे। जैसे जैसे भारत की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है और गाँवों तक इंटरनेट की पहुँच होती जा रही है, इसी वजह से आज के डिजिटल युग इंटरनेट में क्षेत्रीय भाषाओं में सामग्री की माँग भी बढ़ रही है। हम हिंदी की ही बात करें, तो 2011 से 2021 के बीच भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बारे में एक सर्वे किया गया था, इस सर्वे में जो बातें सामने आई वो हैरान करने वाली थी।

इस सर्वे के अनुसार 2016 में भारत में अंग्रेजी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 175 मिलियन (17.5 करोड़) थी और 2021 में 199 मिलियन (19.9 करोड़) तक बढ़ने का अनुमान है। भारत की क्षेत्रीय भाषाओं की बात करें तो, 2016 में 234 मिलियन (23.4 करोड़) इंटरनेट उपयोगकर्ता क्षेत्रीय भाषाओं का उपयोग कर रहे थे, और 2021 में इसके 536 मिलियन (53.6 करोड़) तक पहुंचने का अनुमान है।

इस सर्वे को आप नीचे दी गई Image से भी देख सकते हैं की कैसे भारत में क्षेत्रीय भाषाओं का दबदबा इंटरनेट पर बढ़ता जा रहा है।

Hindi Internet Users
Hindi Internet Users

भारत में 90% नए इंटरनेट उपयोगकर्ता क्षेत्रीय भाषाओं में सामग्री का उपभोग करते हैं : Google Report /≈Hindi Internet Users

Jio के लॉंच होने से भारत में सस्ते इंटरनेट पैकेजों की वजह से भारत में इंटरनेट क्रांति ने जन्म लिया है। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में भी इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच में वृद्धि ने क्षेत्रीय भाषाओं में इंटरनेट सामग्री की खपत बढ़ चुकी है। Google के अनुसार, वर्तमान में देश के 10 नए इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में से 9 भारत की क्षेत्रीय भाषाओं में ऑनलाइन सामग्री का उपभोग कर रहे हैं।

Google इंडिया की वरिष्ठ उत्पाद प्रबंधक निधि गुप्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि सभी भारतीय भाषाओं में, ऑनलाइन सामग्री के उपभोग के लिए हिंदी सबसे अधिक लोकप्रिय है। बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, “हिंदी भाषा में इंटरनेट सामग्री की खपत में 2015-16 के दौरान 90% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि इसी दौरान भारत में इंटरनेट में अंग्रेजी सामग्री की वृद्धि केवल 19% थी।”

देश में इस इंटरनेट बूम से पहले यानी Jio के लॉंच से पहले, भारतीय भाषाओं में ऑनलाइन उत्पादों, सेवाओं और सामग्री के सीमित विकल्प थे।निधि गुप्ता ने कहा कि Google ने स्थानीय भाषा में सामग्री की बढ़ती मांग को ध्यान में रखा है और इसलिए अपने मौजूदा उत्पादों और सेवाओं में अधिक से अधिक भारतीय भाषाओं के समर्थन को जोड़ा है।

भारतीय भाषाओं को आगे बढ़ाने के लिए Google का प्रयास

Google भारतीय भाषाओं ख़ासकर हिंदी में अपनी सेवाओं को आगे बढ़ाने के लिए गूगल कई प्रयास कर रहा है। जैसे Google News, जो कंपनी द्वारा विकसित एक समाचार एग्रीगेटर ऐप्लिकेशन (News Agreegatore Application) है, ने हाल ही में अपने मंच (Platform) पर समाचार (News) के लिए अधिक भारतीय भाषाओं को जोड़ा है। भारत में Google News : हिंदी, मराठी, बंगाली और तमिल सहित दस से अधिक भाषाओं में स्थानीय पाठकों के लिए समाचार प्रदान करता है।

यह पहली बार नहीं है कि Google अपने प्लेटफॉर्म पर और अधिक भाषाओं को जोड़ने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। 2018 में, इस तकनीकी दिग्गज Google के प्रमुख उत्पाद, Google Home और Google Home Mini में भारत के लिए स्पेशल रूप से हिंदी को आधिकारिक कम्यूनिकेशन मोड़ के रूप में जोड़ा गया।

Hindi Language Internet Users
Hindi Language Internet Users

इसके अलावा अगस्त 2019 में, Google ने अपने नए प्रोजेक्ट – Question Hub के माध्यम से स्थानीय भाषाओं में सामग्री की उपलब्धता में अंतर को समझने में लोकल कंटेंट पब्लिशर की मदद कर रहा है। Google Question Hub एक ऐसा मंच है, जहां विभिन्न भारतीय प्रकाशक भारत में स्थानीय उपयोगकर्ताओं के लिए प्रासंगिक सामग्री की पहचान करके उनके लिए अपनी क्षेत्रीय भाषा में सामग्री प्रदान कर सकते हैं।

डिजिटल युग में हिंदी का महत्व क्यों बढ़ रहा है? /≈Why is Hindi important on the Internet?

भारत की सबसे बड़ी प्रिंट-मीडिया कंपनी, डीबी कॉर्प लिमिटेड और 57 वर्षीय फूड ब्लॉगर निशा मधुलिका अपनी सफलताओं के बारे में बात करते हुए बताया कि उनकी सफलता का मुख्य कारण हिंदी में अपनी डिजिटल सामग्री पब्लिश करना है। भारत और दुनिया भर में लगभग 50 करोड़ हिंदी बोलने वालों के साथ, हिंदी सामग्री में निवेश करने वाले व्यवसाय आज के समय में इंटरनेट उपभोक्ताओं को उनकी क्षेत्रीय भाषा हिंदी में सामग्री हासिल करने में मदद कर रहे हैं।

डीबी डिजिटल के सीईओ ज्ञान गुप्ता ने बताया गया कि – 5 साल पहले डीबी कॉर्प ने हिंदी भाषाई इंटरनेट उपभोक्ताओं के लिए एक रोडमैप को रणनीतिक रूप देते हुए काम शुरू किया था, तब हमने 40 करोड़ हिंदी बोलने भारतीय उपभोक्ताओं को ध्यान में रखा और अपनी ऑनलाइन न्यूज़ वेबसाइट्स को हिंदी में पब्लिश करना शुरू किया। हम आश्वस्त थे कि भारत में हिंदी भाषा में हमारा ऑनलाइन platform सफल होगा और हुआ भी यही।

5 साल पहले हमारे द्वारा बनाई गई इसी रणनीति की वजह से आज डीबी डिजिटल द्वारा संचालित bhaskar.com भारत में सबसे बड़ी हिंदी समाचार वेबसाइट (Hindi News Websites) और देश में तीसरी सबसे बड़ी मीडिया वेबसाइट (Media Website) है।

इसी तरह मधुलिका ने बताया कि उन्होंने 2010 में एक हिंदी फ़ूड़ ब्लॉग (Hindi Food Blog) शुरू किया था और इसके साथ उन्होंने हिंदी भाषा में ही YouTube चैनल लॉंच किया था। आज के समय में मधुलिका के इस Hindi Food Blog Youtube Channel पर 3,80,000 से अधिक subscribers हैं मधुलिका Youtube शेफ के रूप में एक स्तर बन चुकी हैं।

वर्तमान हिंदी डिजिटल सामग्री और आने वाली चुनौतियाँ

अर्चना गंगवार जो की हिंदी कवि हैं और कई ब्लॉगर समूहों (Blogger Groups), कवि समुदायों (Poet Communities) और साहित्यिक समूहों (Literary Groups) की सक्रिय सदस्य भी हैं। अर्चना हिंदी भाषा की एक उत्कृष्ट पब्लिशर हैं। लेकिन वह कहती हैं, “एक बार वह अपनी बहू के साथ ऑनलाइन चैटिंग करते समय, मैंने उल्लेख किया कि वह प्रतिबंधात्मक शैली ‘sadhi’ में लिखती है, लेकिन वह इसे ‘साडी’ के रूप में पढ़ी। कई दिनों तक, वह सोचती रही कि मेरी लेखन शैली ग़लत है, लेकिन फिर मेरे बेटे ने उसको समझाया।”

हिंदी जो की प्राचीन भाषा है और इसका सबूत 11वीं शताब्दी की शुरुआत में भी मिलता है, एक पटकथा के रूप में सुंदर है, लेकिन डिजिटल हिंदी सामग्री को बनाने, खोज और एक्सेस करने के लिए एक बाधा भी है। यहां तक कि DB कॉर्प, जिनके पास 300 सदस्यों की एक इन-हाउस टीम है और bhaskar.com के लिए हिंदी सामग्री बनाने का काम करते हैं। DB कॉर्प का भी कहना है कि – हिंदी टाइप यानी हिंदी भाषा में इंटरनेट में कंटेंट पब्लिश करना बहुत ही मुश्किल काम है।

हिंदी वर्णमाला 12 स्वर और 36 व्यंजन से मिलकर बना है और डेवलपर्स के लिए यह पता लगाने की एक चुनौती है कि सबसे लोकप्रिय या अक्सर उपयोग किए जाने वाले संयोजन क्या हैं। फिर कीबोर्ड पेजों के बीच लोगों को बार-बार फ्लिप करने की आवश्यकता के बिना सब कुछ छोटे स्क्रीन में फिट करने का काम है। Google में अंतर्राष्ट्रीयकरण की कार्यक्रम प्रबंधक ऋचा सिंह चित्रांशी कहती हैं, “हिंदी में टाइप करने के लिए, या किसी अन्य इंडिक भाषा में, पूरे फोन की सेटिंग उस भाषा में होनी चाहिए।

बहुत से लोग दो कारणों से अपनी इंटरफ़ेस भाषा सेटिंग्स को स्वैप नहीं करना चाहते हैं। या तो वे अंग्रेजी ओएस के साथ सहज हैं या डरते थे कि दूसरे यह सोच सकते हैं कि वे अंग्रेजी नहीं पढ़ सकते हैं, जो उनकी छवि के लिए एक ख़राब होगा। किसी को भी हिंदी में लिखना कठिन हो सकता है। इसे संबोधित करने के लिए, हमने उपकरणों को ठीक से ट्यून किया है ताकि लोग अब अंग्रेजी में अपनी फोन सेटिंग्स को रखते हुए हिंदी में टाइप कर सकें।

एक अन्य चुनौती phonetic translations के मानकीकृत (standardization) सेट की कमी है, जिससे QWERTY कीबोर्ड पर हिंदी वर्णों को इनपुट करना मुश्किल हो जाता है। हिंदी डिजिटल सामग्री की बढ़ती माँग को ध्यान में रखते हुए, Google डेवलपर्स ने Hindi character इनपुट को आसान करने के लिए कई समाधान तैयार किए हैं, जिसमें एक बेहतर इंडिक कीबोर्ड भी शामिल है, जिसे कुछ महीने लॉन्च किया गया था।

जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अपनी मूल भाषा में पढ़ने में अधिक सहज है, जैसे कि हिंदी, बंगाली, पंजाबी, या अन्य। हम उपयोगकर्ताओं को अपनी भाषा में अपने दोस्तों, परिवारों और प्रियजनों को लिखने के लिए सक्षम करना चाहते हैं। Google पर इनपुट विधियों के लिए उत्पाद प्रबंधक लिंडा लिन और इंडिक-कीबोर्ड विकास टीम के एक प्रमुख सदस्य ने कहा – सामग्री को और भी पठनीय और सुलभ बनाने के लिए, हमारी टीम ने Google Font (Noto) की एक श्रृंखला (series) भी विकसित की, जिसमें सिर्फ़ इंडिक भाषाएँ शामिल की गई हैं।

Google का नया Indic Keyboard भारत की 11 स्थानीय भाषाओं का समर्थन करता है। और लोगों को अपनी भाषा में लिखने में सक्षम बनाता है।

हिंदी भाषा की चुनौतियाँ

हिंदी में लिखना और ऑनलाइन पब्लिश करने का काम कठिन होता है, इसके लिए सरकार और गूगल जैसी कंपनियों को ज़रूर ध्यान देना चाहिए।

किसी भी भाषा की महत्ता तब तक बनी रहती है, जब तक उसका विकास होता है। अगर किसी भाषा का विकास रुक जाए तो वह किसी काम की नही राह जाती है। जैसे की आप संस्कृत का उदाहरण ले सकते हैं। भारत में कुछ समय पहले संस्कृत का काफ़ी उपयोग किया जाता था, और ये आप बोल चल की भाषा भी थी। लेकिन अब केवल धार्मिक कामों के लिए संस्कृत का उपयोग होता है। संस्कृत आम बोल चल से हमेशा के लिए दूर हो चुकी है।

इसी तरह अगर हम हिंदी में भी बदलाव को मान्यता नही देंगे, तो कुछ समय बाद हिंदी की जगह सभी लोग English का उपयोग शुरू कर देंगे। आज हमें सबसे ज़्यादा ज़रूरत हिंदी भाषा में होने वाले के बदलावों को मान्यता देने की है।

इसे आप ऐसे समझिए कि आज के समय में हर भारतीय चाहे पढ़ा लिखा हो या नही वह रेलगाड़ी के लिए ‘ट्रेन’ शब्द उपयोग करता है। यह ‘ट्रेन’ शब्द English का है। अगर हम लोगों को मजबूर करें की वह ‘ट्रेन’ की जगह ‘रेलगाड़ी’ शब्द का उपयोग करें, तो कोई नही करने वाला। ऐसे ही हज़ारों शब्द हैं, जो हैं तो किसी दूसरी भाषा जैसे English या उर्दू के लेकिन उनका इस्तेमाल हिंदी बोलने में किया जाता है। हमें ऐसे बदलावों को मान्यता देनी ही होगी, अन्यथा हिंदी को आम बोलचाल की भाषा से दूर करने का पूरा आरोप हम सब पर ही होगा।

दूसरी तरफ़ आप English को लीजिए – आज के समय में भी English में सुधार किया जाता है और हर साल उसमें कुछ नए शब्द जोड़े जाते हैं जो की किसी दूसरी भाषा के होते हैं और English के अनुपयोगी शब्द हटा दिए जाते हैं। जैसे की आप ‘कढ़ी’ को लीजिए। ‘कढ़ी’ भारतीय भोजन है जिसको English में ‘कढ़ी’ ही कहा जाता है।