प्रत्युपकार का उपसर्ग और मूल शब्द क्या है? | Pratyupkaar me Upsarg aur Mool Shabd

हिंदी व्याकरण में, उपसर्ग एक ऐसा शब्द है जो किसी मूल शब्द के आरंभ में लगाया जाता है और उस शब्द के अर्थ में परिवर्तन या विशिष्टता उत्पन्न करता है। मूल शब्द वह शब्द होता है जिससे उपसर्ग का प्रयोग करके नया शब्द बनाया जाता है।

प्रत्युपकार शब्द में, “प्रति” उपसर्ग है और “उपकार” मूल शब्द है। यहाँ “प्रति” उपसर्ग का अर्थ है “सामने, बदले में, प्रतिफल”। अतः, “प्रत्युपकार” शब्द का अर्थ है “सामने का उपकार, बदले में किया गया उपकार, प्रतिफल रूप में किया गया उपकार”।

“उपकार” शब्द का अर्थ है “किसी के लिए किया गया अच्छा काम, भलाई”। अतः, “प्रत्युपकार” शब्द का अर्थ है किसी के द्वारा किए गए उपकार के बदले में किया गया उपकार।

उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति की मदद करता है, तो वह व्यक्ति उस व्यक्ति का उपकार करता है। यदि उस व्यक्ति को उस मदद के बदले में कुछ करना पड़ता है, तो वह उस व्यक्ति का प्रत्युपकार करता है।

“प्रत्युपकार” शब्द का प्रयोग विभिन्न संदर्भों में किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, सामाजिक संदर्भ में, किसी व्यक्ति द्वारा किए गए उपकार के बदले में उसके लिए कुछ करना प्रत्युपकार कहलाता है। धार्मिक संदर्भ में, किसी देवता या देवी की पूजा के बदले में उनके लिए कुछ करना प्रत्युपकार कहलाता है।

“प्रत्युपकार” शब्द के कुछ समानार्थी शब्द हैं:

  • बदला
  • पलटा
  • प्रतिफल
  • प्रतिदान

“प्रत्युपकार” शब्द के कुछ विलोम शब्द हैं:

  • उपकार न करना
  • कृतघ्नता
  • अहसानफरामोशी