भारत की 25 कंपनियाँ इसरो के अंतरिक्ष कार्यक्रम प्रोजेक्ट IN-SPACe में शामिल होने के लिए उत्सुक हैं – ISRO IN-SPACe Project /≈ISRO Latest News

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IN-SPACe Latest News : भारतीय अंतरिक्ष अन्वेषण (Indian Space Exploration) को बढ़ावा देने के लिए ISRO द्वारा नवगठित भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe : Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) में शामिल होने के लिए 25 कंपनियाँ उत्सुक हैं।

IN Space Full Form : Indian National Space Promotion and Authorisation Centre

IN Space Full Form in Hindi : भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र

ISRO, IN-SPACe प्रोजेक्ट के द्वारा भारत में प्राइवेट कंपनियों के साथ मिलकर काम करना चाहता है और अंतरिक्ष अन्वेषण (Space Exploration) को बढ़ावा देना चाहता है। जैसा की NASA करता है, जिससे अमेरिका में कई बड़ी अंतरिक्ष अन्वेषण (Space Exploration) प्राइवेट कंपनियाँ बन चुकी हैं।

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IN-SPACe Latest News

ISRO के IN-SPACe प्रोजेक्ट में शामिल होने से इन प्राइवेट कंपनियों को एक ऐसा मंच मिल जाएगा, जहाँ से ये स्पेस टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करके बड़ी छलाँग लगा सकती हैं और भारत को अंतरिक्ष अन्वेषण (Space Exploration) के क्षेत्र में पहली पंक्ति में खड़ा होने में मदद कर सकती है।

अभी तक भारत में अंतरिक्ष अन्वेषण (Space Exploration) का पूरा काम ISRO द्वारा किया जाता है, लेकिन किसी एक कंपनी के लिए यह बहुत मुश्किल कम है, इसलिए प्राइवेट कंपनियों को आगे आना चाहिए।

अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को मंजूरी देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूरा श्रेय देते हुए, अंतरिक्ष विभाग के लिए राज्य मंत्री (MoS) जितेंद्र सिंह ने कहा कि 25 से अधिक उद्योगों ने विभाग से संपर्क किया है। ये कंपनियाँ भारत के दिशानिर्देशों के अनुसार अंतरिक्ष गतिविधियों में भाग लेना चाहती हैं।

उन्होंने कहा – निजी भागीदारी के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने का कदम प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उठाया गया एक पथ-प्रदर्शक कदम है और देश भर के प्रमुख निजी खिलाड़ियों द्वारा इसका व्यापक रूप से स्वागत किया गया है। उन्होंने आगे कहा – ISRO और भारत सरकार का यह कदम भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को बढ़ावा देगा।

निजी क्षेत्र की कंपनियों को अंतरिक्ष गतिविधियों की अनुमति देने और विनियमित करने के संबंध में स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए अंतरिक्ष विभाग के तहत एक अलग IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) एजेन्सी बनाई गई है। IN-SPACe कार्यक्रम के तहत अंतरिक्ष गतिविधियों की प्रस्तावित सीमा में लघु उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (Small Satellite Launch Vehicle), भू-स्थानिक सेवाएं (Geospatial services), उपग्रह कोंस्टेलेशन (Satellite Constellation), अनुप्रयोग उत्पाद (Application products) आदि शामिल हैं।

भारत सरकार और ISRO का यह प्रयास केवल यह सुनिश्चित करने के लिए नहीं है कि भारत एक प्रतिस्पर्धी अंतरिक्ष बाजार बन जाए, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी कि अंतरिक्ष कार्यक्रम का लाभ सबसे गरीब लोगों तक पहुंचे।

MoS ने कहा कि यह केंद्र सरकार के गरीबों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से हर सुधार की योजना बनाने के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए और भारत को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में निरंतर प्रयास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के लिए है किया गया है।

सिंह ने कहा – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के ऐप्लिकेशन (Space Technology Application) पिछले छह वर्षों में, बुनियादी ढांचे के विकास (Infrastructure Development) के विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ आम नागरिक के जीवनयापन में आसानी लाने के लिए आगे बढ़ाए गए हैं।

आज के समय में अंतरिक्ष और उपग्रह प्रौद्योगिकी (Space & Satellite Technology) का व्यापक रूप से उपयोग रेलवे, सड़क और पुल निर्माण, कृषि क्षेत्र, आवास, टेली-मेडिसिन, आदि के अलावा आपदा प्रबंधन और सटीक मौसम पूर्वानुमान में किया जा रहा है। ये सब आम जनता के जीवन से जुड़े हुए मुद्दे हैं।

इसी तरह अगर भारत की प्राइवेट कंपनियाँ भी स्पेस टेक्नोलॉजी में काम शुरू करती हैं, तो आप जनता के जीवन को और आसान बनाना पॉसिबल हो जाएगा। इसी को ध्यान में रखने हुए प्रधानमंत्री मोदी जी ने ISRO के साथ मिलकर IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) को स्थापित करने की योजना बनाई थी और अब इसमें 25 कंपनियाँ शामिल होने की इच्छुक हैं। जो हमारे आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते क़दम को दर्शाता है।