इसरो 2030 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन लॉंच करेगा, भारत के अपने स्पेस स्टेशन की पूरी जानकारी – ISRO Indian Space Station by 2030

Indian Space Staton in Hindi : इसरो (ISRO) अपनी सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक 2030 तक अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन (ISRO Space Station /≈Indian Space Station) लॉन्च करने की योजना बना रहा है। इस बारे में इसरो के अध्यक्ष के सिवन द्वारा 13 जून 2019 को घोषणा की गई थी। यह परियोजना इसरो को अंतरिक्ष में और अधिक अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने में सक्षम करेगी।

Indian Space Station
Indian Space Station

अभी इसरो अपने गगनयान मिशन में लगा हुआ है, जिसके द्वारा भारत पहली बार इंसानों को अंतरिक्ष में भेजेगा।

इसरो के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि भारत अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में शामिल नहीं होगा, बल्कि इसी तरह के नए अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण स्वयं करेगा। इसरो के इस Indian Space Station Mission का पूरा विवरण भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन – गगनयान (Gaganyaan) के सफल होने के बाद सामने आएगा।

भारत के अपने अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण गगनयान परियोजना का विस्तार होगा। उन्होंने कहा हमें गगनयान कार्यक्रम को निरंतर बनाए रखना है और आगे भी मानवयुक्त स्पेस मिशन भेजने हैं इसलिए, एक दीर्घकालिक योजना के रूप में हम भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन (Indian Space Station) बनाने की योजना बना रहे हैं।

हम चांद (Moon), क्षुद्रग्रहों (Asteroids) के लिए मानवयुक्त मिशन भेज कर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के विशिष्ट क्लब में शामिल होने जा रहे हैं। इसरो अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक स्पष्ट योजना बना रहा है, ताकि भारत को स्पेस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

इसरो अध्यक्ष ने कहा, “हम एक अलग अंतरिक्ष स्टेशन (Space Station) बनाने की योजना बना रहे हैं। हम आईएसएस (ISS – International Space Station) का हिस्सा नहीं होंगे। हमारा स्पेस स्टेशन (Indian Space Station) थोड़ा छोटा होगा, लेकिन भारत की ज़रूरतों के अनुसार बनाया जाएगा।

हम एक छोटा मॉड्यूल शुरू करेंगे और इसका उपयोग माइक्रोग्रैविटी प्रयोगों को करने के लिए किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसरो अंतरिक्ष स्टेशन (ISRO Space Station) की योजना बनाकर अंतरिक्ष पर्यटन (Space Tourism) को बढ़ावा देने का काम करने जा रहा है।

स्पेस स्टेशन क्या है? /≈अंतरिक्ष स्टेशन क्या है? /≈What is a space station in Hindi?

अंतरिक्ष स्टेशन एक रहने योग्य कृत्रिम उपग्रह (Habitable Artificial Satellite) है, जिसे अंतरिक्ष में रहने के लिए डिज़ाइन किया जाता है और आगे चल कर इसका इस्तेमाल क्रू मेंबेर्स को बसाने के लिए किया जा सकता है।

अंतरिक्ष स्टेशन, अन्य अंतरिक्ष यान (spacecraft) को डॉक करने में मदद करने के साथ अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक स्पेस स्टेशन की तरह काम करता है, जहाँ वो पृथ्वी से अंतरिक्ष की यात्रा में जाते समय रुक सकते हैं।

पृथ्वी की निचली कक्षा में अभी केवल एक पूरी तरह कार्यात्मक अंतरिक्ष स्टेशन (space station) है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station – ISS) कहा जाता है।

भारत के अपने Indian Space Station के बारे में मुख्य बिंदु /≈Indian Space Station

  • भारत के पहले गगनयान मिशन (Gaganyaan Mission) 2022 के बाद इसरो की तरफ़ से केंद्र सरकार को सबसे पहला प्रस्ताव भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन (Indian Space Station) बनाने के लिए भेजा जाएगा।
  • अंतरिक्ष स्टेशन कार्यक्रम के पूरी तरह चालू होने यानी स्पेस में भेजने में लगभग 5-7 साल का समय लगने की उम्मीद है। इसरो के अध्यक्ष ने प्रस्तावित परियोजना की लागत पर अभी कोई बात नहीं की है।
  • इसरो के अपने अंतरिक्ष स्टेशन का वजन 20 टन होने की संभावना है। इसका उपयोग माइक्रोग्रैविटी प्रयोगों को करने के लिए किया जाएगा।
  • इसरो अपने स्पेस स्टेशन को लॉंच करने के बाद शुरू में इस स्पेस स्टेशन में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 15-20 दिनों के लिए भेजने की योजना है।
  • भारत के अपने अंतरिक्ष स्टेशन (Space Station) को इसरो पृथ्वी से 400 किमी ऊपर की कक्षा में रखे जाने की उम्मीद कर रहा है।
  • इसरो का स्पेस स्टेशन मिशन (India’s Space Mission) भारत की अंतरिक्ष गतिविधि को बढ़ाएगा क्योंकि इसरो का अंतरिक्ष स्टेशन, स्पेस रिसर्च के लिए एक स्वतंत्र सुविधा के रूप में कार्य करेगा।

इसके अलावा एक बात और है – भारत एकमात्र ऐसा राष्ट्र नहीं है, जो अपना स्पेस स्टेशन बनाने का लक्ष्य रख रहा है, इससे पहले चीन ने भी अपने स्पेस स्टेशन योजना का ख़ुलासा किया था और वो इस पर काम भी शुरू कर चुका है, जबकि अभी इसरो ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Indian Space Station) को बनाने का काम शुरू नही किया है। इसके 2022-23 में शुरू होने की उम्मीद है।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन कार्यक्रम (Indian Space Station Project) से पहले इसरो की परियोजनाएं

इसरो के आगामी स्पेस मिशन निम्नलिखित हैं :

–> ISRO 2020 तक अपने सूर्य मिशन (Sun Mission) आदित्य-एल 1 (Aditya-L1) को 2020 में लॉंच करने की योजना बनाई थी, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से इसरो के Aditya-L1 मिशन में देरी हो चुकी है, अब Aditya-L1 के 2021 में लॉंच किए जाने की सम्भावना है।

इसरो का आदित्य एल 1 मिशन (Aditya-L1 Mission) सूर्य के कोरोना (corona) का अध्ययन करेगा, जो सूर्य के वायुमंडल का सबसे बाहरी हिस्सा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, धरती के जलवायु परिवर्तन में कोरोना (corona) का बहुत बड़ा प्रभाव है।

–> इसके बाद इसरो शुक्र के लिए एक interplanetary mission की योजना बना रहा है। इसरो के इस मिशन का नाम शुक्रयान (Shukrayaan) होगा। इसरो अपने शुक्रयान (Shukrayaan) मिशन को फ़्रान्स के साथ मिलकर आगे बढ़ाएगा।

इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने शुक्र को बहुत अधिक तापमान वाले और जलते हुए ग्रह के रूप में वर्णित किया। उन्होंने विस्तार से बताया कि शुक्र के भेजे गए दुनिया के अधिकांश मिशन विफल हो गए हैं, इसी वजह से इसरो इस ग्रह के वायुमंडलीय संरचना को समझने और अध्ययन करने के लिए अपने शुक्रयान मिशन (Shukrayaan Mission) को सफल बनाना चाहता है।

–> अभी इसरो भारत के पहले पहला मानवयुक्त मिशन पर काम कर रहा है, जिसक नाम – गगनयान (Gaganyaan) है, इसरो के गगनयान (Gaganyaan) को 2021 या 2022 में लॉंच किया जा सकता है।

ISS क्या है? /≈What is ISS in Hindi /≈What is International Space Station in Hindi

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (International Space Station – ISS) को संयुक्त राज्य अमेरिका के अंतरिक्ष संगठन (NASA), यूरोपीय देशों के अंतरिक्ष संगठन (ESA), जापान की अंतरिक्ष एजेन्सी (JAXA), कनाडा की अंतरिक्ष एजेन्सी (CSA) और रूस की अंतरिक्ष एजेन्सी (Roscosmos) के बीच साझेदारी में बनाया गया था।

International Space Station - ISS
International Space StationISS

आईएसएस (ISS – International Space Station) विज्ञान और प्रौद्योगिकी में दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय सहकारी कार्यक्रम (International Cooperative Programme) है। यह पृथ्वी की कक्षा में मानव निर्मित सबसे बड़ा निर्माण है और इसे पृथ्वी से नग्न आंखों से देखा जा सकता है।

अंतरिक्ष स्टेशन के पहले घटक को 1998 में अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया था और पहले दीर्घकालिक चालक दल के सदस्य इस पर नवंबर 2000 में आए थे और तब से अब तक इसमें हमेशा कोई ना कोई रहता है।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS – International Space Station) के कई पार्ट्स हैं जैसे कि – दबाव वाले आवास मॉड्यूल (Pressurised Habitation Modules), संरचनात्मक ट्रस (Structural Trusses), सौर सरणियाँ (Solar Arrays), रेडिएटर (Radiators), डॉकिंग पोर्ट (Docking Ports), प्रयोग बेज़ (Experiment Bays) और रोबोटिक हथियार (Robotic Arms)।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के सभी घटकों को रूसी प्रोटॉन (Russian Proton) और सोयुज (Soyuz) रॉकेट और अमेरिकी अंतरिक्ष शटल (American Space Shuttles) द्वारा लॉन्च किया गया था।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISSInternational Space Station) एक सूक्ष्मजीव और अंतरिक्ष पर्यावरण अनुसंधान प्रयोगशाला के रूप में कार्य करता है, जिसमें चालक दल के सदस्य जीव विज्ञान, मानव जीव विज्ञान, भौतिकी, खगोल विज्ञान, मौसम विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में प्रयोग करते हैं।

अंतरिक्ष स्टेशन लगभग 92 मिनट में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरा करता है और यह प्रति दिन 15.5 बार पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करता है। अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन (ISSInternational Space Station) के 2030 तक संचालित रहने की उम्मीद है।