जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव रेणु स्वरूप ने मंगलवार को कहा कि कोरोनो वायरस के खिलाफ विकसित होने वाले सभी टीकों को 2-8 डिग्री सेल्सियस पर संग्रहीत किया जाएगा क्योंकि तापमान को एक कारक के रूप में देखते हुए लॉजिस्टिक्स पर काम किया गया है।

Indian vaccines for storage at 2-8 deg Cel
Indian vaccines for storage at 2-8 deg Cel

कोरोना के ख़िलाफ़ विकसित हुई सभी वैक्सीन में तापमान नियंत्रण एक ऐसा कारण था, जिसके कारण भारत में इन वैक्सीन का वितरण नही हो पाता। इसी को ध्यान में रख कर भारतीय कंपनियों ने वैक्सीन तैयार की है।

स्वरूप ने कहा कि भारत बायोटेक की कोविड-19 वैक्सीन कोवैक्सीन और ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड में इम्यूनोसैस लैब परीक्षण काफी मजबूत हैं।

स्वरुप ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा – हमारे सभी टीकों के लिए, हम स्टोरेज को 2-8 डिग्री सेल्सियस तक लक्षित कर रहे हैं क्योंकि हमारे लॉजिस्टिक्स पर उस आधार पर काम किया जा रहा है और हम उस पर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि Zydus Cadila द्वारा विकसित किया जा रहा डीएनए वैक्सीन, और Biological E की mRNA वैक्सीन 2-8 डिग्री सेल्सियस के भंडारण तापमान पर काम करती हैं।

फाइजर और मॉडर्न के विपरीत, जिसे माइनस 70 डिग्री सेल्सियस (कोल्ड) श्रृंखला की आवश्यकता होती है, यह (Biological E का वैक्सीन) मूल रूप से 2-8 डिग्री सेल्सियस पर काम करता है।

Zydus Cadila की कोरोना वैक्सीन को फेज-3 का क्लिनिकल परीक्षण करने की मंजूरी दी गई है जबकि Biological E की वैक्सीन अपने पहले चरण के क्लिनिकल परीक्षण में है।

स्वरूप ने कहा कि डॉ रेड्डी की प्रयोगशालाओं ने रूस के गैमालेया संस्थान के साथ साझेदारी की है और भारत के लिए 2-8 डिग्री सेल्सियस पर भंडारण को लक्षित करके एक टीका विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने (डॉ रेड्डी की प्रयोगशालाओं) ने देश में फेज-2 और 3 के क्लिनिकल परीक्षणों की शुरुआत की है। उन्होंने 1,000 सब्जेक्ट्स पर फेज-2 के परीक्षण का पहला क्लिनिकल परीक्षण पूरा कर लिया है और वे अब अंतरिम डेटा देखकर उसका विश्लेषण कर रहे हैं।

उन्होंने दो बड़े वैश्विक परीक्षण भी किए हैं, जैसे कि एस्ट्राज़ेनेका। और वो एस्ट्राज़ेनेका के डेटा को भी देख रहे हैं। स्वराज ने कहा कि वे जो लक्ष्य कर रहे हैं वह भारत के लिए प्रयास करना है और देखना है कि यह 2-8 डिग्री पर वैक्सीन का स्टोर कैसे हो सकता है।

भारत में विभिन्न चरणों में 30 वैक्सीन विकसित हो रही हैं

देश के ड्रग रेगुलेटर ने रविवार को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका कोविशिल्ड के लिए आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दे दी और स्वदेशी रूप से विकसित कोवैक्सीन को भी यही मंज़ूरी दी प्रदान की है, हालांकि इन वैक्सीन की प्रभावकारिता और सुरक्षा पर पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं है, जिसने एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

स्वरूप ने कहा, इन दो टीकों के बारे में अभी बात की गई है, हमारे पास मजबूत इम्यूनोसेशन हैं जिनका अध्ययन प्रयोगशालाओं के माध्यम से किया गया है।

ट्रांसलेटेड हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (टीएचएसटीआई), डीबीटी के तहत एक संस्थान, फरीदाबाद का हवाला देते हुए, स्वरूप ने कहा कि लैब में इम्यूनो-सेट हैं – जो जैव रासायनिक परीक्षण हैं।

स्वरूप ने कहा कि कुछ भी जो इम्यूनोसेशन लैब से निकलता है वह आपको यह विश्वास दिलाता है कि यह मजबूत परख प्रणाली से गुजरा है, जो आपको इम्युनोजेनेसिटी और सुरक्षा डेटा देता है।