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लोमड़ी और अंगूर की कहानी || Lomdi Aur Angoor ki Kahani

Lomdi Aur Angoor ki Kahani (लोमड़ी और अंगूर की कहानी इन हिंदी) : छोटे बच्चों को शिक्षा देने के लिए लोमड़ी और अंगूर की कहानी बहुत ही प्रसिद्ध हिंदी कहानी है। यह कहानी लोमड़ी और अंगूर के पेड़ में लगे फल के गुच्छे के बारे में है, जिसे वह लटकते हुए देखती है और  मीठे अंगूरों को खाने के लिए क्या करती है? क्या लोमड़ी प्रयास करके अंगूर खा पाती है या फिर उसका प्रयास असफल हो जाता है? जानने के लिए इस कहानी को पूरा पढ़ें.

लोमड़ी और अंगूर की कहानी (Lomdi Aur Angoor ki Kahani)

काफ़ी समय पहले किसी एक लोमड़ी दोपहर में खाने की तलाश के लिए जंगल में इधर-उधर घूम। ज्यादा चलने की वजह से लोमड़ी को बहुत ही ज्यादा भूख-प्यास लग जाती है। लेकिन उसे खाने के लिए कुछ भी नहीं मिल रहा था। ना तो उसे पेड़ पर लगे फल दिख रहे थे और ना ही कोई शिकार मिल रहा था। वह इधर-उधर भटकते हुए जंगल में दूर तक जा पहुंची, फिर भी उसे खाने के लिए कुछ न मिला।

भूखी-प्यासी लोमड़ी को समझ नहीं आ रहा था, कि वह अपनी भूख को आखिर शांत कैसे करें। तभी उसकी नजर पास के एक बगीचे पर पड़ी। लोमड़ी जब उस बाग के पास से निकली तो उसे बड़ी ही मीठी सुगंध आ रही थी। सुगंध सूंघ कर वो तेजी से बाग की ओर अपने कदम इस उम्मीद से बढ़ाने लगी कि अब उसकी खाने की तलाश जल्द ही खत्म होने वाली है।

जैसे-जैसे वह बाग के नज़दीक आती, महक और भी तेज होती जा रही थी। जैसे ही वह बगीचे में पहुंची, तो उसने देखा कि बाग तो अंगूर की बेलों से लदा पड़ा है। अंगूर की बेलों में लगे हुए रसीले और मीठे फलों को देख कर लोमड़ी के मुँह में पानी आ गया।

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रसीले और मीठे अंगूर देख कर वो सोचने लगी अगर ये खानें को मिल जाए तो इस गर्मी में उसकी भूख-प्यास मिट जाएगी और वो आराम कर सकेगी। वह अंगूर के गुच्छों को देखते ही सोचने लगी कि अब इन्हें मेरे अलावा कोई और नहीं खाएगा।

अंगूरों को खाने के लोमड़ी झट से एक लंबी छलांग मारी, लेकिन वह अंगूरों तक पहुंच नहीं सकी और धड़ाम से जमींन पर आ गिरी क्योंकि अंगूर का वह गुच्छा काफी ज्यादा ऊंचाई पर लगा था। कई बार प्रयास करने के बाद भी वह असफल रही और अंगूर नही खा पाई।

कई बार प्रयास करने के बाद जब लोमड़ी असफल हो जाती है और उसे अंगूर खाने को नही मिलते वो हार मान लेती है। इतनी कोशिश करने के बाद भी उसे एक भी अंगूर भी नहीं मिल पाता है।

बार-बार असफल प्रयास करने के बाद जब लोमड़ी को अंगूर खाने को नही मिलते तो वो सोचने लगती है – मैं भी कहां अपनी मेहनत और समय बेकार कर रही हूं, ये तो खट्टे अंगूर हैं। इनते खट्टे अंगूर कौन खाएगा? मैं तो एक चालाक लोमड़ी हूं और इन खट्टे अंगूर को खाना मुझे शोभा भी नहीं देता। ये मेरी शान के खिलाफ है। कोई पागल ही होगा जो इन्हें खाने की सोचेगा?

लोमड़ी ने अंगूर पाने की अपनी आस पूरी तरह छोड़ दी और हार मान ली। अपनी विफलता को छिपाने के लिए उसने खुद सोच लिया कि अंगूर बहुत खट्टे हैं, इसलिए मुझे ये नहीं खाना। ऐसा कहकर लोमड़ी वहां से चली गई।

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Lomdi Aur Angoor ki Kahani (लोमड़ी और अंगूर की कहानी) से क्या शिक्षा मिलती है?

लोमड़ी और अंगूर की कहानी (Lomdi Aur Angoor ki Kahani) से हम इंसानों को सीख मिलती है कि अगर हम बिना प्रयास किए किसी चीज को पाने की कोशिश करते हुए उसे पाने में असफल हो जाते हैं, तो उस चीज के लिए हमें  गलत बात नही करनी चाहिए और अपनी ग़लत राय नहीं बनानी चाहिए। इसके साथ ही हमें सफलता पाने के लिए हार नहीं माननी चाहिए और कठिन मेहनत करनी चाहिए।

किसी कार्य को करने के कई तरीक़े होते हैं। इसलिए अगर आप किसी काम में असफल हो जातें हैं, तो ये मान कर हार मत मान लीजिए ये आपसे नही होगा या हो नही सकता है। उस कार्य में सफलता पाने के लिए बार-बार प्रयास करें क्योंकि  जब हम कोई कार्य करने में असमर्थ रहते हैं तो हमें उस कार्य को किसी अन्य तरीके से करना चाहिए।

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