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Mars Facts in Hindi | मंगल ग्रह के रोचक तथ्य

Mars Facts in Hindi : हेलो दोस्तो! आज हम अपने सौरमंडल के सूर्य से चौथे नंबर के ग्रह मंगल के बारे में विस्तार से जानेंगे। साथ ही मंगल ग्रह के रोचक तथ्यों के बारे में (Amazing Facts About Mars) भी बात करेंगे

मंगल, सूर्य से चौथा ग्रह है। यह सौरमंडल का दूसरा सबसे छोटा ग्रह है। युद्ध के रोमन देवता के नाम पर, मंगल के लाल रंग के कारण इसको अक्सर “लाल ग्रह” के रूप में वर्णित किया जाता है। मंगल एक स्थलीय ग्रह है, जिसका वातावरण मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड से बना एक पतला वातावरण है।

Mars Facts in Hindi
Mars Facts in Hindi

मंगल ग्रह की महत्वपूर्ण जानकारी

मंगल का इक्वेटोरियल व्यास (Mars Equatorial Diameter)6,792 किमी
मंगल का ध्रुवीय व्यास (Mars Polar Diameter)6,752 किमी
मंगल का द्रव्यमान (Mars Mass)6.39 × 10 ^ 23 किलो (पृथ्वी का 0.11 )
मंगल के चंद्रमा (Mars Moons)2 (फोबोस और डीमोस)
मंगल की ऑर्बिट दूरी (Mars Orbit Distance)227,943,824 किमी (1.38 AU)
मंगल की कक्षा अवधि (Mars Orbit Period)687 दिन (1.9 वर्ष)
मंगल के सतह का तापमान (Mars Surface Temperature)-87 से -5 डिग्री सेल्सियस
मंगल के बारे में पहला रिकॉर्डदूसरी सहस्राब्दी ई.पू.
मंगल के बारे में पहला रिकॉर्ड किया गयामिस्र के खगोलविद द्वारा

Mars Facts in Hindi | मंगल ग्रह के रोचक तथ्य

आइए हम जानते हैं मंगल ग्रह के कुछ रोचक तथ्यों के बारे में जिनको जान कर आपका दिमाग उड़ जाएगा – Interesting Facts About Mars in Hindi

  • मंगल और पृथ्वी का लगभग एक ही भूभाग है : भले ही मंगल ग्रह (Mars Planet) के पास पृथ्वी का केवल 15% हिस्सा है और पृथ्वी के द्रव्यमान का सिर्फ 10% हिस्सा है, पृथ्वी की सतह का लगभग दो तिहाई हिस्सा पानी में ढका हुआ है। मंगल ग्रह की सतह का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी का केवल 37% है (जिसका अर्थ है कि आप मंगल पर लगभग तीन गुना अधिक छलांग लगा सकते हैं)।
  • मंगल ग्रह में सौरमंडल के सबसे ऊंचे पर्वत हैं : मंगल ग्रह (Mars Planet) का ओलंपस मॉन्स (एक ज्वालामुखी शील्ड) पर्वत 21 किमी ऊंचा और 600 किमी व्यास का है। अरबों वर्ष पहले का ज्वालामुखी होने के बावजूद, इस ज्वालामुखी के लावा के प्रवाह के प्रमाण हाल के कई वैज्ञानिकों को मिला है और उनका मानना है कि यह अभी भी सक्रिय हो सकता है।
  • मंगल ग्रह पर भेजे गए केवल 28 मिशन ही सफल रहे हैं : 30 जुलाई 2020 तक मंगल पर 62 मिशन भेजे हो चुके हैं, जिनमें ऑर्बिटर्स, लैंडर्स और रोवर्स शामिल हैं, इनमें से 5 मंगल मिशन अभी मंगल की ओर बढ़ रहे हैं यानी रास्ते में ही हैं, साथ ही केवल 28 मिशन ही सफल हो पाए हैं, बाक़ी सब किसी ना किसी वजह से फ़ेल हो चुके हैं।
  • मंगल पर पहले प्रयास में सफल होने वाला सिर्फ़ एक देश : मंगल ग्रह (Mars Planet) के लिए जितने भी मिशन या स्पेसक्राफ़्ट धरती से भेजे गए हैं, उनमे से कोई भी स्पेसक्राफ़्ट पहले प्रयास में इस ग्रह पर नही पहुँच पाया, लेकिन एक अजूबा भी हुआ है। भारत का मंगलयान दुनिया का इकलौटा ऐसा मंगल मिशन था, जो अपने पहले प्रयास में ही मंगल पर पहुँचने में कामयाब रहा है।
  • मंगल ग्रह में हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े धूल वाले तूफान आते हैं : मंगल ग्रह (Mars Planet) पर आने वाले धूल के तूफ़ान इतने बड़े और ख़तरनाक होते हैं की वे महीनों तक ग्रह पर रह सकते हैं और पूरे ग्रह को कवर कर सकते हैं। मौसम भी इसमें बहुत खतरनाक होता है क्योंकि सूर्य के चारों ओर उसके अण्डाकार (अंडाकार आकार) कक्षीय पथ सौर मंडल के अन्य ग्रहों की तुलना में अधिक लम्बा है।
  • मंगल पर सूर्य पृथ्वी पर दिखाई देने वाले सूर्य के लगभग आधे आकार का दिखाई देता है : सूर्य के निकटतम बिंदु पर, सूर्य की ओर मंगल का दक्षिणी गोलार्ध झुकता है, जिससे एक छोटी लेकिन तीव्र गर्मी होती है। जबकि इस समय उत्तरी गोलार्ध पर बहुत ज़्यादा ठंड होती है। सूर्य से अपने सबसे दूर बिंदु पर, मंगल ग्रह (Mars Planet) अपने उत्तरी गोलार्ध की ओर झुकता है। इससे उत्तरी गोलार्ध पर एक लंबी लेकिन हल्की गर्मी शुरू हो जाती है, जबकि इस समय दक्षिणी गोलार्ध पर सर्दियाँ चालू हो जाती हैं।
  • मंगल के टुकड़े पृथ्वी पर गिरे थे : वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर गिरे उल्कापिंडों के भीतर मंगल ग्रह से आए टुकड़ों के छोटे-छोटे निशान पाए हैं, जो मंगल से बाहर निकले हैं। यह टुकड़े पृथ्वी पर गिरने से पहले लाखों वर्षों तक सौर प्रणाली (सोलर सिस्टम) की परिक्रमा करते हैं। पृथ्वी पर मंगल के टुकड़ों के अवशेष मिलने के बाद ही वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह (Mars Planet) का अध्ययन शुरू किया था।
  • मंगल ग्रह का नाम रोमन के युद्ध के देवता पर है : प्राचीन यूनानियों ने मंगल को planet Ares के नाम से बुलाते थे। इसी तरह रोमन मंगल ग्रह (Mars Planet) को इसके लाल कलर के कारण अपने युद्ध के देवता के नाम पर इसका नामकरण किया था। आप सभी जानते होंगे की हमारे सोलर सिस्टम के सभी ग्रहों का नाम (पृथ्वी को छोड़कर) रोमन के देवी-देवताओं पर ही है। इसी तरह अन्य प्राचीन संस्कृतियों ने भी मंगल ग्रह के लाल रंग पर ध्यान केंद्रित किया था। जैसे की चीन के खगोलविदों के लिए यह अग्नि तारा (the fire star) था, जबकि मिस्र के पुजारियों ने मंगल को ‘Her Desher’ या ‘the red one’ कहा था।
  • मंगल ग्रह का रंग लाल है : आपको जानकर हैरानी होगी की हमारे सोलर सिस्टम के मंगल ग्रह (Mars Planet), जो पृथ्वी के बाद का ग्रह है, इसका रंग लाल है। मंगल का लाल रंग इसके यह चट्टान और धूल के साथ लोहे की सतह से ढका होता है। यानी इसकी सतह पर बहुत ज़्यादा लोहा पाया जाता है।
  • मंगल पर तरल पानी के संकेत मिले हैं : सालों से चल रही खोज से हमें मंगल ग्रह (Mars Planet) में बर्फ के रूप में पानी की मौजूदगी के संकेत मिले थे, लेकिन अब इसमें तरल पानी के भी सबूत मिल रहे हैं। तरल पानी के संकेत के रूप में मंगल ग्रह (Mars Planet) में पानी के बहने के कारण बने संकेत, गड्ढे, गड्ढ़ों की दीवारों पर गहरे धारीदार धब्बे हैं और उपग्रह चित्रों में देखी गई चट्टानें हैं, जो पानी के बहाव से कटी हुई प्रतीत होती है जैसा कि पृथ्वी में होता है। वैज्ञानिकों का कहना है की मंगल के वायुमंडल के कारण इस पानी को वाष्पीकरण से बचाने के लिए यह नमकीन होना चाहिए।
  • आगे चल कर मंगल का अपना रिंग ( Mars Ring) होगा : अगले 20-40 मिलियन वर्षों में मंगल ग्रह (Mars Planet) का सबसे बड़े चंद्रमा फोबोस (Phobos) गुरुत्वाकर्षण की वजह से टूट सकता है, जिससे मंगल में एक रिंग का निर्माण होगा, जो अगले 100 मिलियन वर्षों तक रह सकता है।
  • मंगल पर सूर्यास्त नीले रंग का होता है (Sunsets on Mars) : मंगल ग्रह के दिन के दौरान इसका आसमान गुलाबी-लाल होता है, जो पृथ्वी के आकाश के विपरीत है। साथ ही मंगल का सूर्यास्त (Sunsets on Mars) भी नीले रंग का होता है।
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