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तीसरे विश्व में कौन-कौन से देश शामिल हैं

तीसरे विश्व में कौन-कौन से देश शामिल हैं : Third World Countries शीतयुद्ध के समय बनाई गई एक टर्म है, जिसका इस्तेमाल कुछ देशों के ग्रुप के लिए किया जाता है। इनको तीसरी दुनिया के देश भी कहा जाता है।

तीसरे विश्व में कौन-कौन से देश शामिल हैं

तीसरा विश्व (Third World Countries) शीतयुद्ध के समय में इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है। शीतयुद्ध में अमेरिका और रूस के बीच हर क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा हो रही थी और कई बार युद्ध जैसी बातें होने लगती थी। उस समय में कुछ देश ऐसे भी थे जो ना तो नाटो के साथ थे न ही सोवियत गुट के साथ। ऐसे सभी देशों को तृतीय विश्व या तीसरे विश्व के देश कहा जाता था।

इस शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल फ्रांसीसी इतिहासकार अल्फ्रेड सॉवी ने 14 अगस्त 1952 को ‘ल ऑब्जर्वेतो’ मैगजीन में पब्लिश किए गए अपने एक आर्टिकल में किया था।

उस समय तीसरे विश्व के देशों में – भारत, मिस्र, युगोस्लाविया, इंडोनेशिया, मलेशिया, अफगानिस्तान समेत एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के तमाम विकासशील देश थे।

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शीतयुद्ध के समय में संयुक्त राज्य अमेरिका, पश्चिमी यूरोप के देश तथा उनके कई साथी देशों को ‘प्रथम विश्व’ कहा जाता था। जबकि सोवियत ख़ेमे में शामिल देशों जैसे – सोवियत संघ, चीन, क्यूबा तथा उनके सहयोगियों को ‘द्वितीय विश्व’ कहा जाता था।

तीसरे विश्व में शामिल देशों के नाम क्या हैं

शीत युद्ध के समय में तीसरे विश्व (Third World) में ‘भारत, मिस्र, युगोस्लाविया, इंडोनेशिया, मलेशिया, अफगानिस्तान समेत एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई विकासशील देश शामिल थे।

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हालाँकि वर्तमान परिपेक्ष में देखें तो अब तीसरे विश्व के समूह में शामिल देशों की संख्या 120 हो चुकी है। तीसरे विश्व के देशों के इस संगठन को वर्तमान में गुट निरपेक्ष कहा जाता है। इसके 120 सदस्य देश और 16 पर्यवेक्षक देश हैं। साथ ही कई अतिथि देश भी शामिल किए जाते हैं जिनका निर्धारण होने वाले प्रत्येक शिखर सम्मेलन में किया जाता है।

वर्तमान समय में तीसरे विश्व में शामिल देशों के नाम इस प्रकार हैं (teesre vishwa mein kaun kaun se desh shamil hain) :-

  1. 4 पर्यवेक्षक देश – चीन, कजाकिस्तान, किर्गीस्तान और ताजिकिस्तान।
  2. अफ्रीका महाद्वीप के सभी 54 अफ्रीकी देश इसके पूर्णकालिक सदस्य हैं।
  3. एशिया और ओसनिया के 40 देश इस संगठन के पूर्णकालिक सदस्य हैं।
  4. अमेरिकी महाद्वीप के 26 सदस्य देश हैं जबकि 7 पर्यवेक्षक देश – “अर्जेंटीना, ब्राजील, कोस्टा रीका, अल सल्वाडोर, मैक्सिको, पराग्वे और उरूग्वे” हैं।
  5. यूरोप का केवल एक सदस्य देश – ‘बेलारूस’ है। जबकि यूरोप के 4 देश “अर्मेनिया, मोंटेनिग्रो, सर्बिया और यूक्रेन” इसके पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त हैं।

यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि यूरोपीय देशों के लिए इस तीसरे विश्व के संगठन का कोई औचित्य नही दिखाई देता क्योंकि 1992 से एक भी यूरोपीय देश ने इसके शिखर सम्मेलन का आयोजन नहीं किया है।

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