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टोपी बेचने वाला और बंदर की कहानी || Topiwala aur Bandar ki Kahani in Hindi

Topiwala aur Bandar ki Kahani in Hindi (टोपी बेचने वाला और बंदर की कहानी इन हिंदी) : छोटे बच्चों को शिक्षा देने के लिए टोपीवाला और बंदर की कहानी बहुत ही मशहूर हिंदी कहानी है। यह कहानी एक टोपी बेचने वाला और बंदर के ऊपर है। बंदर टोपी लेकर पेड़ में चढ़ जाते हैं, उसके बाद क्या टोपीवाला बेचने वाला बंदरों से अपनी टोपियाँ वापस ले पाता है कि नही जानने के लिए इस हिंदी कहानीTopiwala aur Bandar ki Kahani’ को पूरा पढ़ें।

टोपी बेचने वाला और बंदर की कहानी || Topiwala aur Bandar ki Kahani in Hindi

काफ़ी समय पहले की बात है। एक बार की बात है, एक टोपी बेचने वाला गर्मियों के दिनों अपनी टोपियाँ बेचने के लिए जंगल से होकर नज़दीक के एक गाँव जा रहा था। तेज धूप होने की वजह से उसे प्यास और थकान लगी। वो सोचा क्यूँ ना कुछ देर पेड़ की छाया में बैठ कर आराम किया जाए।

टोपीवाला एक पेड़ के नीचे उसकी छाँव में बैठ गया और अपने साथ लाया पानी पिया और ज़्यादा थकान की वजह से थोड़ी देर वही लेट कर आराम करने का फैसला किया।

अत्यधिक थकान की वजह से वो गहरी नींद में चला जाता है और शाम होने लगती है। इसी बीच टोपी बेचने वाला जब सो रहा था, तो कई बंदर पेड़ से नीचे आ गए और टोपी वाले का बैग खींच लिए।

बंदरों ने जब बैग खोला तो उसके अंदर उन्हें कई रंग-बिरंगी टोपियां मिलीं। बंदर टोपीवाला की टोपियां लेकर पेड़ पर चढ़ गए।

कुछ समय बाद जब टोपीवाले की नींद खुली तो उसे अपना बैग दूर पड़ा दिखाई दिया, वो इधर-उधर देखने लगा कि आख़िर उसकी टोपियाँ कौन ले गया? तभी उसकी नज़र पेड़ की टहनियों में बैठे बंदोरों पर पड़ी। उनके हाथ में टोपी थी। Topiwala बंदरों को अपनी टोपी का इस्तेमाल करते हुए देखकर हैरान-परेशान हो गया।

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वह बंदरों पर चिल्लाने लगा ताकि उसकी टोपियाँ वापस मिल जाएँ, लेकिन चिल्लाने से टोपी बेचने वाले को कोई फ़ायदा नही हुआ। बल्कि उसके चिल्लाने से बंदर भी शोर करने लगे, इससे टोपी बेचने वाला बंदरों के ऊपर चिढ़ गया। 

वो पास में जमीन में पड़े कुछ पत्थर उठाए और उनसे बंदरों को मारने लगा। टोपीवाला के ऐसा करने से बंदर भी अपने हाथ में रखे फल को टोपी बेचने वाले पर फेंकने शुरू कर दिए।

बंदरों की ऐसी हरकत करने से टोपी बेचने वाला बहुत हैरान हो गया। फिर उसके मन में एक योजना सूझी। अब उसने अपने सिर में पहनी हुई टोपी को उतार कर जमीन पर फेंक दिया। उसके ऐसा करने से बंदर भी बंदर भी उसकी नक़ल किए और वो ली हुई टोपियों के नीचे फेंक दिए। कुछ ही पल में टोपी बेचने वाला की सारी टोपियाँ जमीन पर गिर आईं।

इसके बाद टोपी बेचने वाले ने अपनी सभी टोपियां ज़मीन से एकत्र कर ली और अपने बैग में वापस भर कर बेचने के लिए दूसरे गांव की ओर चला दिया।

Topiwala aur Bandar ki Kahani in Hindi (टोपी बेचने वाला और बंदर की कहानी) से क्या सीख मिलती है (Moral of The Story)

टोपी बेचने वाला और बंदर की कहानी (Topi Bechne wala aur Bandar ki Kahani in Hindi) की इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि जिस बुद्धि और चतुराई ही सब कुछ होती है और जब कोई काम आसान तरीक़े से नही बने तो उस काम में सफलता पाने के लिए अपनी बुद्धि और चतुराई का इस्तेमाल करना चाहिए। इस कहानी का Moral है “ज्ञान सबसे बड़ा हथियार है, जिसे किसी भी काम में सफलता पाई जा सकती है।”

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कहानी #2 : घसीटाराम ‘टोपी बेचने वाला और बंदर की कहानी’

एक समय की बात है ‘राजा झटका’ के राज्य में एक टोपीवाला रहता था, जिसका नाम ‘घसीटाराम’ था। घसीटाराम टोपी बेचने वाला हमेशा शहर से टोपियां खरीद कर गांव-गांव जाकर उनको बेचा करता था। टोपीवाला घसीटाराम बहुत ही हंसमुख स्वभाव का था और उसके टोपी बेचने की कला बहुत ही मजेदार थी।

टोपी बेचने वाले घसीटाराम में दिमाग़ की कमी थी, वो बहुत ही कमजोर बुद्धि का इंसान था। गर्मी के मौसम के एक दिन की बात है, दोपहर के समय वो अपनी टोपियाँ लेकर शहर से नज़दीक के गांव में बेचने जा रहा था। तब बहुत ही तेज धूप थी।

चलते-चलते उसे एक पेड़ दिखता है, वो उसी पेड़ की छाँव में कुछ देर बैठ कर आराम करने का सोचता है। फिर वो पेड़ के नीचे बैठ कर पानी पीटा है और कुछ देर आराम करने के लिए लेट जाता है, तभी उसे नींद आ जाती है।

कुछ देर बाद जब वो सो रहा था तो पेड़ से बंदर आए और टोपी बेचने वाले की टोपियाँ लेकर पेड़ में चढ़ गए। जब वो नींद से जगा तो अपनी टोपियाँ ना पाकर चिल्लाने लगा और भागते-भागते राजा झटका के दरबार में जा पहुँचा और अपनी व्यथा सुनाई।

उसकी दुःख भरी कहानी सुन कर राजा ने अपने सबसे काबिल मंत्री को कुछ सिपाहियों के साथ टोपी बेचने वाले के साथ भेज दिया।

राजा के मंत्री और उसके सिपाही पेड़ के पास आकर देखते हैं कि Topi Bechne Wale की सभी टोपियाँ बंदर लेकर पेड़ के ऊपर बैठे हैं, वो सब से पहले बंदर को पत्थर मारते हैं और चिल्लाते हैं ताकि वो टोपियाँ नीचे फेंक दें। लेकिन जब बंदर टोपीवाले की एक भी टोपी नीचे नही गिराते हैं, तो मंत्री ने सोचा अब कुछ उपाय करना चाहिए।

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उसने टोपी बेचने वाले से टोपी ली और उसे पहन लिया, उसके ऐसा करने से एक-एक करके सभी बंदरों ने भी टोपी पहन ली। कुछ पल बाद मंत्री ने टोपी उतार कर जमीन में फेंक दी और ताली बजाने लगा। नकलची बंदर भी अपनी टोपियाँ नीचे ज़मीन में फेंक दी और ताली बजाने लगे।

इसके बाद टोपी बेचने वाले ने अपनी सभी टोपियाँ दोबारा अपने बैग में भरी और उन्हें बेचने के लिए दूसरे गाँव की तरफ़ चल दिया।

इस Topiwala aur Bandar Story in Hindi Written से हमें सीख मिलती है कि जिस तरह से अपनी बुद्धिमत्ता के बल पर उस मंत्री ने बंदरों से टोपी वापस ले ली उसी प्रकार हमें भी किसी कार्य में असफलता मिलने पर उसे छोड़ नही देना चाहिए जैसे की टोपीबेचने वाले घसीटाराम ने किया था, बल्कि कोई दूसरा तरीक़ा इस्तेमाल करना चाहिए।

निष्कर्ष

यहाँ पर हमने Topiwala aur Bandar Story in Hindi Writtenटोपी बेचने वाला और बंदर की कहानी” एक मोरल स्टोरी बताई है। आशा करते हैं कि यह हिंदी कहानी आपको पसंद आएगी। इसे अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया में जरूर शेयर करें।

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