उपसर्ग की परिभाषा, भेद और उदाहरण : Upsarg ki Paribhasha (हिंदी, संस्कृत में)

उपसर्ग की परिभाषा : कई स्टूडेंट Upsarg ki Paribhasha खोजते हैं और जानना चाहते हैं कि उपसर्ग की परिभाषा क्या है। अगर आप भी उपसर्ग की परिभाषा खोज रहे हैं, तो इस आर्टिकल में उपसर्ग की पूरी जानकारी दी गई है, इसके प्रकार, भेद, उदाहरण सहित। इसके साथ ही हिंदी के संस्कृत में भी पूरी जानकारी आपको मिल जाएगी।

उपसर्ग की परिभाषा

उपसर्ग वह अव्यय होते हैं, जो किसी शब्द के पहले लगकर उस शब्द का अर्थ बदल देते हैं। उपसर्ग किसी शब्द के आगे जुड़कर उस शब्द को एक विशेष अर्थ प्रदान करता है।

उपसर्ग शब्द दो शब्दों “उप” और “सर्ग” से मिलकर बना है, इसमें ‘उप’ शब्द का अर्थ होता है “निकट” और “सर्ग” का अर्थ होता है “रचना करना”। इस प्रकार उपसर्ग की परिभाषा होगी – “ऐसे शब्द किसी दूसरे शब्द के आगे लगकर उसके अर्थ को बदल देते हैं, उन्हें उपसर्ग कहा जाता है।

  • उपसर्ग हमेशा किसी शब्द के पहले जुड़ता है।
  • उपसर्ग शब्द का आकार और अर्थ बदल देता है।
  • उपसर्ग अव्यय होते हैं।
  • किसी शब्द में उपसर्ग जोड़ने से हमेशा नए शब्द बनता है। जिसका अर्थ भी अलग होता है।
  • उपसर्ग किसी शब्द के साथ मिलकर उसका आकार और अर्थ दोनों बदल देता है।

उपसर्ग की परिभाषा संस्कृत में

धातु रूपों और धातुओं से निष्पन्न शब्दरूपों से पूर्व प्रयुक्त होकर उनके अर्थ का परिवर्तन करने वाले शब्दों को उपसर्ग कहते हैं। अर्थात् जो शब्द किसी शब्द के पहले लग कर उसका अर्थ और आकार बदल देते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं।

संस्कृत में :-

उपसर्गेण धात्वर्थो बलादन्यत्र नीयते।
प्रहाराहार संहार विहार परिहारवत्।

उपसर्ग किसे कहते हैं : Upsarg Kise Kahate Hain (PDF Download)